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आधे घंटे के दांव से तमिलनाडु के सीएम ने लगाया पांच साल की सत्ता पर निशाना

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सरगर्मी जोरों पर है। रैलियों, नुक्कड़ सभाओं के अतिरिक्त राजनीतिक दलों ने अपने क्षेत्र की जातीय व सामाजिक संरचना के आधार पर भी दांव खेले हैं। तमिलनाडु में ऐसा ही एक दांव खेला है एआईएडीएमके ने।

पांच साल तक राज करने लायक सीटें जीत सके इसलिए एआईएडीएमके ने राज्य में चुनाव की घोषणा होने से महज आधे घंटे पहले वन्नियार समुदाय को अतिपिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण प्रदान करने वाला बिल विधानसभा में पास करा लिया।

एआईएडीएमके का यह दांव कितना फायदेमंद होगा और कितना नुकसानदेह, यह तो समय के गर्भ में है, लेकिन इतना साफ है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीसामी ने डीएमके को असहज जरूर कर दिया है।

इसलिए दिया गया आरक्षण

इस अहम दांव की कहानी कुछ यूं है। तमिलनाडु में वन्नियार समुदाय को अतिपिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण दिए जाने की मांग लंबे समय से होती रही है। दिसंबर 2020 में भी इसे लेकर एक हिंसक प्रदर्शन किया गया।

वन्नियारों के लिए आरक्षण की मांग की झंडाबरदार रही है एस रामदोस की पार्टी पट्टाली मक्कल काची यानी पीएमके। पीएमके के करीब 500 सदस्यों ने बीते साल दिसंबर में चेन्नई के एक बाहरी इलाके में हिंसक प्रदर्शन किया। वाहनों और ट्रेन पर पत्थर फेंके, ट्रैफिक जाम किया।

इसके पहले 1980 में भी वन्नियारों के आरक्षण के लिए ऐसा ही हिंसक प्रदर्शन किया गया था। दरअसल पीएमके की लंबे समय से मांग रही है कि वन्नियारों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 20 फीसदी आरक्षण दिया जाए।

चुनाव में एआईएडीएमके का पीएमके के साथ गठबंधन है। बस यहीं से पलानीसामी ने वन्नियारों को आरक्षण वाला राजनीतिक लाभ का विचार लपक लिया और आनन फानन में जाति आधारित जनगणना की संभावना तलाशने के लिए रिटायर्ड जज के नेतृत्व में आयोग का गठन कर दिया। आयोग को अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए छह माह का समय दिया गया।

आयोग की रिपोर्ट का नहीं किया इंतजार

राजनीति के मंझे खिलाड़ी पलानीसामी ने आयोग की रिपोर्ट आने तक इंतजार करना ठीक नहीं समझा और दो महीने बाद ही राज्य विधानसभा में वन्नियारों को अतिपिछड़े वर्ग के 20 फीसदी कोटा में 10.5 फीसदी आरक्षण देने वाला बिल पेश कर दिया।

राज्य में चुनाव की तारीखों के ऐलान से महज आधे घंटे पहले इस बिल को एआईएडीएमके की सरकार ने पारित भी करा लिया। इस पर सवाल भी हुए क्योंकि बिल पारित किए जाने के समय विपक्ष के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे।

विपक्षी विधायकों ने विधानसभा सत्र का बहिष्कार कर रखा था। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती है। मुख्यमंत्री ने बिल पारित करने के बाद साफ किया कि फिलहाल वन्नियारों को अस्थायी आधार पर आरक्षण दिया गया है

और जाति आधारित जनगणना पूरी होने के बाद इसमें सुधार किया जाएगा। उन्होंने राजनीति में एक और पासा फेंकते हुए साफ किया कि यह बिल पीएमके की पहल पर लाया गया है।

 

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