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चीन को सबक सिखा कर पुतिन ने 5 घंटे में भारत के लिए कर दिया ये बड़ा काम

पिछले साल देश के अंदर जब से कोरोनावायरस आया है और दुनिया में इसका खौफ शुरू हुआ है उसके बाद से ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन केवल दूसरी बार देश से बाहर निकले हैं उनका दूसरा दौरा भारत का था! वही उन्होंने तमाम बड़े बड़े वैश्विक कार्यक्रम जैसे कि जी-20 का कार्यक्रम, अमेरिका दौरा तमाम कार्यक्रम रद्द कर दिए थे यानी कि राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा फिर से साबित कर देता है कि रूस और भारत की दोस्ती कितनी ज्यादा गहरी हैं और रूस के दिन में भारत के लिए क्या स्थान है!

हालांकि दिखने में तो रूस के राष्ट्रपति का दौरा केवल 5 घंटे के लिए लग सकता है लेकिन यूक्रेन के साथ जं ग जैसे हालात में भी भारत का दौरा करना भारत के प्रति रूस की दोस्ती और प्यार को ही दर्शाता है वहीं राष्ट्रपति का यह दौरा भारत और रूस के रिश्ते को मजबूत नींव को दिशा देता है और विश्लेषकों का मानना है कि रूस ने ग्लास्को में हुए जी-20 और भी भारत को वरीयता दी है और यूक्रेन के साथ चरम पर पहुंचे तनाव के बीच भी पुतिन ने भारत दौरे के लिए समय निकाला है!

केवल दूसरी बार बाहर निकले

पिछले साल मार्च 2020 के बाद यह दूसरा मौका है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश छोड़ दिया है। इस साल की शुरुआत में उन्होंने जिनेवा का दौरा किया था, जहां उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की थी। जिसका जिक्र खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन के सामने किया और कहा, ”राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा दिखाता है कि उन्हें भारत से कितना लगाव है, क्योंकि उन्होंने पिछले 2 साल में दूसरी बार ही विदेश यात्रा की है.” पीएम मोदी ने कहा कि, ”राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के साथ रूस के संबंधों को कितना महत्वपूर्ण बताया है, उनका दिल्ली दौरा यह साबित करता है.”

6 लाख करोड़ का आर्थिक समझौता

जब दुनिया के दो महाशक्तिशाली देशों के नेता मिले तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को उड़ान देने के लिए 6 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 80 अरब डॉलर के समझौते हुए. जिसके तहत साल 2015 तक दोनों देश 50 अरब डॉलर का दोतरफा निवेश बढ़ाएंगे और दोनों देशों के बीच व्यापार 30 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ जाएगा. राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 278 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. आपको बता दें कि भारत और रूस के बीच 2020-21 में आपसी व्यापार 8.1 अरब डॉलर रहा है। जिसमें भारतीय निर्यात 2.6 अरब डॉलर का था, जबकि रूसी निर्यात 5.48 अरब डॉलर का था। अब दोनों देशों ने दोतरफा निवेश को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का नया लक्ष्य रखा है।

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