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हमेशा रहे इन तीन लोगो से सावधान ,नहीं तो खतरे में पड़ सकते है आप के प्राण !

चाणक्य नीति में हमे कई सारी ऐसी बातो की जानकारी मिलती है जो कि हमारे लिए काफी फायदेमंद रहती हैं। जिंदगी से जुडी कई समस्याओ का हल हमे चाणक्य नीति से मिल जाता है। आज के इस आर्टिकल के जरिए हम आप को कुछ ऐसी ही जानकारी देने जा रहे हैं जो आप के लिए काफी सहायक हो सकती है।

आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता, बुद्धिमता और क्षमता के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्‍यात हुए। आचार्य चाणक्य की नीतियों का अद्भुत संग्रह है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।जितना वह दो हजार चार सौ साल पहले था, जब इसे लिखा गया था।

चाणक्य नीति में तीन लोगो से हमेशा सावधान रहने के लिए कहा गया है और यह भी बताया गया कि इन तीन लोगो को कभी भी कम आंकने की गलती नहीं करनी चाहिए। अगर इन्हे गंभीरता से नहीं लिया गया तो इनकी वजह से जान तक गवां सकते हैं। तो जानिए इन तीन लोगो के बारे में !

चाणक्य नीति में मित्र और दुश्मन के बारे में बहुत विस्तार से जानकारी दी गई है। आज जिन तीन लोगो की बात करने जा रहे है इन्हे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्यूंकि ऐसा करना बहुत भारी पड़ सकता है। इन्हे कम आंकना मतलब खुद को मुसीबत में डालना और इनसे हमे समझदारी से काम लेना चाहिए। इन 3 लोगों से दूरी बनाकर रखें। ऐसे लोगों के पास रहने से जान खतरे में पड़ सकती है और आइए जानते हैं चाणक्य ने किन 3 लोगों से सावधान रहने को बोला जा रहा है।

1]शत्रु :

चाणक्य नीति में पहला स्थान शत्रु को दिया गया है क्यूंकि शत्रु से बड़ा खतरा किसी और नहीं होता है। चाणक्य नीति के अनुसार हमे कभी भी अपने शत्रु को कम नहीं आंकना चाहिए क्युकी शत्रु मौका मिलने पर कभी भी आप पर हमला कर सकता है। शत्रु पर विजय पाने के लिए हमेशा अपने शत्रु की गतिविधयों और ताकतों उसकी पर ध्यान रखना चाहिए और उसे किसी भी तरह का मौका नहीं देना चाहिए जिससे आगे चल कर आप की जान को खतरा हो सकता है।

2]सांप :

चाणक्य नीति में दूसरा स्थान सांप को दिया गया है। चाणक्य कहते हैं की चुप बैठा सांप कब पलटकर वार कर दें इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। सांप के व्यवहार से उसकी ताकत को समझना मुश्किल है और ऐसे में सांप को कभी परेशान न करें नहीं तो लेने के देने पड़ सकते हैं। चाणक्य नीति में सांप की तुलना दुर्जन व्यक्ति से की गई है और चाणक्य कहते है कि सांप की भांति ही दुर्जन व्यक्ति घात लगाकर बैठता है और मौका मिलने पर डस लेता है। इसलिए इन्हे कभी भी कम नहीं आंकना चाहिए और इनसे सावधानी बरतनी चाहिए।

3]रोग :

चाणक्य नीति में तीसरा स्थान रोग का है और शरीर के साथ लापरवाही अच्छे-अच्छे बलवानों की भी जान खतरे में डाल देती है। रोग व्यक्ति का अद्श्य दुश्मन है और इसका सही समय पर इलाज नहीं किया और नजरअंदाज करने पर ये विक्राल रूप ले सकता है। बीमारियां व्यक्ति की सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा है, क्योंकि इंसान अपने लक्ष्य को तभी प्राप्त कर सकता है जब तक वह स्वस्थ और सक्षम हो।

चाणक्य इसके बारे कहते है कि रोग को कम आंकने से छोटा सा रोग किस तरह से बड़ा रोग बन जाता है। उसी प्रकार जब किसी कम ताकत वाले व्यक्ति को हम कम आंकते है तो वही व्यक्ति आगे चलकर आप की जान को खतरे में भी डाल सकता है। इसलिए हमे रोग जैसे धीरे धीरे वार करने वालो का सही समय में इलाज करना चाहिए और उनसे एक हदतक फासला रखना चाहिए। उम्मीद करते हैं यह जानकारी आप के लिए जानकारी सहायक हो।

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