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बकरी चराई, ईट उठाई, गरीबी झेलकर गांव के लड़के ने पास की यूपीएससी, गांव वालों के लिए बन गया मिसाल

अक्सर यही कहा जाता है कि जिंदगी में चाहे कितनी भी मुसीबत आ जाए अगर उसका डटकर सामना किया जाए तो हर एक मुसीबत का समाधान निकाल लिया जाता है! इंसान अपनी लगन से 1 दिन बुलंदियों को छू जाता है! एक ऐसी ही कहानी है किशोर कुमार रजक की! जिन्होंने अपनी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी अपनी मेहनत के आगे सारी चुनौतियों का डटकर सामना किया! अपने लगन और परिश्रम से एक छोटे से गांव से एक बड़े अफसर तक का सफर तय किया! आज उनके नाम से उनके गांव का बच्चा-बच्चा भी प्रेरित है! तो आइए जानते हैं किशोर कुमार रजक की प्रेरित करने वाली कहानी को!

एक समय ऐसा था जब वह कभी बकरियां चलाया करते हैं! ईद के भक्तों पर मजदूरी किया करते थे! अपने कॉलेज में भी फेल हो गए लेकिन अपना अफसर बनने का सपना हमेशा से उन्होंने जीवित रखा! अपनी मेहनत में कोई भी कमी नहीं आने दी और उसके बाद पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा को क्रैक करके अपना दम पूरे गांव वालों को दिखाया!

किशोर कुमार झारखंड के बोकारो जिले में चंदनकेर विधानसभा गांव बुड्डीबिनोर के रहने वाले हैं! धनबाद की कोयला खदान में मजदूर दुर्योधन और रेणुका देवी के घर साल 1986 को उनका जन्म हुआ! किशोर कुमार के चार भाई और एक बहन है और वह उन सब से छोटे हैं! आज के समय में झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 30 किलोमीटर दूर खूंटी जिले में झारखंड पुलिस डीएसपी के पद पर कार्यरत है!

बिना लाइट के पढ़ाई कर बने अफसर

ऐसे में किशोर कुमार बताते हैं कि उनका बचपन बेहद ही गरीबी में बीता उनके घर में बिजली तक नहीं थी उन्होंने दिया और लालटेन की रोशनी में अपनी पढ़ाई को पूरा किया! गांव के खेतों में धान रोपने के बाद पशुओं को चराने के लिए जगह तक नहीं बचती थी तो ऐसे में किशोर कुमार अपने सभी दोस्त निरंजन, वरुण, संभल आदि के साथ घर से 3-4 किलोमीटर काफी घने जंगलों में बकरियां और बैल को चराने के लिए जाया करते थे और उन पर यह सिलसिला खेत खाली होने तक जारी रहा!

मजदूरी करने वाले दिन आज भी याद

किशोर कुमार बताते हैं कि बकरियों को चराने के साथ साथ में है ईट भट्टों पर भी मजदूरी का काम किया करते थे वह मुश्किल दिन वह कभी नहीं भूल सकते अपने चाचा जी के साथ ईट भट्ठे पर मजदूरी करने जाया करते थे! आज भी मुझे याद है कि उस समय भट्टे पर 1000 ईट निकालने के सिर्फ ₹4 और रोड में ईट भरने के सिर्फ ₹12 ही मिलते थे! उस समय सोचा भी नहीं था कि 1 दिन कभी अफसर बन जाऊंगा! मगर मेरे अध्यापक की सीखने मेरी पूरी जिंदगी ही बदल दी! मेरे अध्यापक ने बोला था कि अगर मजदूरी करोगे तो मजदूर ही बनेंगे और मेहनत से पढ़ोगे तो एक अफसर!

IGNOU से की पढ़ाई पूरी

किशोर कुमार की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में शुरू हुई थी और वह सरकारी स्कूल जिसकी छत भी टपकती थी और वह एक ही कमरे में सभी पांच कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठकर साथ में पढ़ाई किया करते थे! अपने स्कूल की पढ़ाई को पूरा किशोर ने साल 2004 में इग्नू से इतिहास विषय में स्नातक के लिए दाखिला लिया और साल 2007 में एक सेमेस्टर में फेल हो गए थे तो उनका हौसला टूट गया! लेकिन फिर अपनी मेहनत के दम पर साल 2008 में उन्होंने स्नातक की डिग्री ले ली!

दिल्ली जाने के भी नहीं थे पैसे

ऐसे में स्नातक की डिग्री लेने के बाद किशोर कुमार अपनी यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आना चाहते थे! लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति से खुद को रोक लिया! उस समय इतना बुरा दिन था कि मेरे जान पहचान वाले ने उधार कुछ रुपए देने से भी मना कर दिया! मेरी बड़ी बहन जिनका नाम पुष्पा देवी है उन्होंने अपनी गुल्लक तोड़ दी, उसमें उनके जमा किए गए ₹4000 निकाले और उन्होंने मुझे दिए! फिर मैं उन पैसों को लेकर दिल्ली के लिए चल दिया जिसके बाद सीधा अपने यूपीएससी की परीक्षा के लिए जुट गया!

असिस्टेंट कमांडेंट की नौकरी छोड़ी

आईएएस या आईपीएस बनने का सपना लेकर दिल्ली आए किशोर कुमार ने अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी परीक्षा 2011 को पहले ही प्रयास में 419 रैंक के साथ पास कर लिया। आईएएस या आईपीएस नहीं बन सका, लेकिन सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सहायक कमांडेंट के पद के लिए चुना गया था। 2013 में, वह उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के सहायक कमांडेंट के रूप में एक साल के प्रशिक्षण पर गए। तब किशोर कुमार को एहसास हुआ कि उन्हें अधिकारी बनकर अपने ही राज्य के लोगों की सेवा करनी चाहिए। ऐसे में छह महीने बाद ट्रेनिंग बीच में छोड़कर दिल्ली वापस आ गया और यूपीएससी की तैयारी करने लगा। यूपीएससी 2015 में इंटरव्यू हुआ, लेकिन इस बार उसका चयन नहीं हुआ।

झारखंड पुलिस में बने डीएसपी

अपने ही राज्य में अधिकारी बनने का सपना लेकर किशोर कुमार दिल्ली से झारखंड लौटे और एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाने लगे। इसके साथ ही राज्य ने पीसीएस की तैयारी भी शुरू कर दी। साल 2016 में उन्होंने स्टेट पीसीएस की परीक्षा पास की और झारखंड पुलिस में डीएसपी बने। वर्तमान में झारखंड पुलिस की स्पेशल इंडियन रिजर्व बटालियन (एसआईआरबी) में कार्यरत हैं।

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