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जाने क्या कहते है हिन्दू वेद- शास्त्र चचेरे ममेरे भाई बहन के बीच शादी को लेकर, हैरान करने वाले है नियम

आज के समय में काफी ज्यादा कुछ देखा जा रहा है शादी को लेकर दरअसल आज के समय में दो प्रकार की शादी होने ही लग गई है एक लव मैरिज और दूसरी अरेंज मैरिज! लव मैरिज यानी कि दोनों की सहमति और अरेंज मैरिज परिवार की सहमति! यह तो आप लोगों को मालूम है लेकिन आज हम बताने वाले हैं कि क्या हिंदू धर्म के अंदर चचेरे और मम्मी रे भाई बहन की भी शादी हो सकती है या नहीं? आखिर क्या है इसके नियम तो आइए जान लेते हैं-

हिंदू धर्म के अंदर मैरिज एक्ट पिता के पक्ष में 5 और माता के पक्ष में 3 पीढ़ियों तक शादी करने की अनुमति नहीं देता है लेकिन कुछ कस्टम्स में क्रॉस मैरिज यानी कि मां के पक्ष में फर्स्ट कजिन मैरिज को परमिशन दी गई है! वही अंतर जाति विवाह और सेहजाति विवाह दोनों में अंत विरोध भी हैं और नियम भी कांट्रडिक्ट्री है! हालांकि यह अंतर्विरोध उनके लिए ज्यादा है जो किसी दूसरे धर्म समाज या देश से आते हैं अन्यथा हिंदू धर्म के अंदर अंतर जाति विवाह और सेहजाति विवाह के नियमों को अच्छे से साधा गया है!

समझे कि एक तरफ जहां हिंदुओं में अंतरजातीय विवाह यानी कि दूसरी जाति के अंदर विवाह करना ठीक नहीं माना जाता तो वहीं दूसरी तरफ सजातीय विवाह के बारे में आम मान्यता यह है कि ब्लड लाइन कनेक्शन ना हो यानी कि समगोत्रीय विवाह भी ना हो! गंगोत्री है तो शादी नहीं हो सकती यह एक लाइन आपने काफी सुनी होगी! दरअसल वही शास्त्रों के अनुसार ऋषि विश्वामित्र, भारद्वाज, गौतम आदि ने नाम पर गोत्र रखे गए वहीं गोत्र की प्रणाली काफी पुरानी है जबकि वर्ण व्यवस्था बाद में आई है माने तो एक हिंदू किसी भी जाति या वर्ण का हो उसके मूल पूर्वज इन्हीं 8 ऋषि में से एक है जिनके नाम पर गोत्र बनाए गए हैं और इसलिए वैदिक हिंदू धर्म में सम गोत्री विवाह की मनाही है ताकि ब्लडलाइन कनेक्शन से बचा जा सके!

लेकिन यदि कजिन से शादी की बात की जाए तो महाभारत काल से ही क्रॉस कजिन मैरिज के ड्रेसेस मिलते रहे हैं कहा तो यह जाता है कि अर्जुन ने अपनी 1st क्रॉस कजिन सुभद्रा से शादी की थी सुभद्रा अर्जुन के ममेरे भाई श्री कृष्ण की बहन थी और यह भी कहा जाता है कि उतरा के अलावा अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की शादी भी उनके कजिन ससीरेखा के साथ हुई थी! हालांकि अर्जुन ने भले ही अपनी ममेरी बहन से शादी की हो लेकिन हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अब ऐसा नहीं हो सकता और कानू और धर्म के चलते क्रॉस कजिन से शादी करने की कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं लेकिन अब विवाह करने वालों को धर्म तक बदलना पड़ा!

साल 2011 के अंदर एक ऐसा ही मामला दिल्ली हाईकोर्ट ने एक कपल के पक्ष में सुनाया था वह भी एक रिटायर्ड जज ोपि गोंग की अर्जी के खिलाफ वही पूर्व जज ने अपने बेटे के खिलाफ और कहा था कि उनके बेटे ने अपनी ही मां मेरी बहन से शादी करनी है जो कि हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार गैरकानूनी लेकिन जब अदालत के सामने यह तथ्य आया कि जज के बेटे ने शादी से पहले ईसाई धर्म अपना लिया तो अदालत ने ओपी गोंग की शिकायत को खारिज कर दिया और उनके ऊपर जुर्माना भी लगा दिया!

वहीं इससे साबित होता है कि हिंदुओं के पिता के पक्ष में कजिन मैरिज का प्रतिशत तो ना के बराबर ही है लेकिन हिंदुओं में जियोग्राफी डाइवर्सिटी धार्मिक मामलों में भी लागू होती है वहीं उदाहरण के लिए आप दक्षिण भारत को देख लीजिए जहां के ब्राह्मणों में फर्स्ट कजिन मैरिज होती रही!

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