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महाराज की सम्पत्ति जानकार अम्बानी-अडानी को भी भूल जायेगे, इतनी है कि कई राज्यों का बजट भी उतना नहीं

मोदी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो चुका है और ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया को उड्डयन मंत्री बनाया गया है! लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कितने की संपत्ति के मालिक हैं? यह सवाल बेहद ही दिलचस्प है और इसका जवाब उतना ही मुश्किल है!

क्योंकि 1957 से लेकर अब तक के चुनाव में सिंधिया के खानदान के उम्मीदवारों ने जितनी भी संपत्ति बताई वह उस आंकड़े से काफी कम है जितनी की आम धारणा उनकी संपत्ति के लिए बनी हुई है!

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव के लिए आवेदन में 2 अरब से ज्यादा समस्या बताई थी लेकिन जिन संपत्तियों को लेकर कई अदालतों में मामले चल रहे हैं उनकी अनुमानित कीमत ही करीब 40,000 करोड़ यानी कि 400 अरब रुपए हैं!

बता दे कि सिंधिया परिवार में संपत्ति को लेकर मामला तो राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जमाने से ही शुरु हो चुका था! मामला राजमाता की दो वसीयतों में अटका हुआ है राजमाता ने वसीयतों में अपनी संपत्ति से बेटे माधवराव सिंधिया और पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी बेदखल कर दिया था!

इस संपत्ति का एक हिस्सा उन्होंने अपनी 3 ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे के नाम कर दिया था! अपने जीते जी माधवराव सिंधिया अदालती मामले करते रहे अब यह काम ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया की तीन बुआ है! मुंबई की हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर सिंधिया परिवार की सारी संपत्ति या विजयाराजे और उनके इकलौते बेटे माधवराव के बीच आधी आधी बांट दी गई थी!

ऐसा राजमाता की ओर से दायर याचिका के बाद किया गया था इसका कारण यह था कि राजमाता के पति जीवाजी राव सिंधिया निधन से पहले कोई वसीयत नहीं छोड़ गए थे! राजमाता और माधवराम के बीच संपत्ति को लेकर मतभेद हो गए थे तो उन्होंने कोर्ट में यह व्यवस्था दी थी!

1990 में माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर कोर्ट में याचिका दायर करके सिंधिया राजवंश की सभी संपत्तियों का अकेला वारिस होने का दावा कर दिया था यह मामला अदालत में ही पड़ा हुआ है राजमाता की तीनों बेटियां माधवराव के इस दावे को सही नहीं मानते हैं!

वह राजमाता की साल 1985 की एक वसीयत का हवाला देती है इस वसीयत के जरिए राजमाता ने अपने बेटे और पोते को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया था इसमें उन्होंने अपनी तीनों बेटियों के नाम कर दी थी बाकी एक तिहाई हिस्सा एक ट्रस्ट के जरिए चैरिटी के लिए था!

राजमाता के वकीलों ने साल 2001 में एक दूसरी वसीयत भी अदालत के अंदर पेश की थी जिसके अंदर राजमाता ने उनकी सारी संपत्ति तीनों बेटियों के नाम पर सर्दी की अदालतें अभी इन वसीयत की वैधता की जांच कर रहे इस बात की संभावना तो कम है कि मामले का जल्द ही निपटारा हो जाएगा!

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