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सवाल: अक्सर छींक मारते समय हो जाती हैं आँखें बंद क्योंकि इसके पीछे भी छुपा हैं ये अहम राज…

यूँ तो छींक आना व्यक्ति के शरीर की पाचक प्रक्रिया (Digestive Process) का एक हिस्सा है, क्योंकि ये एक शरीर को स्वस्थ्य बनाए रखने में काफी मददगार होती है.

1. छींक (Sneezing) में क्यों बंद हो जाती हैं आँखें?

माना गया है कि जब भी हमारी नाक (Nose) में कुछ प्रवेश कर जाता है तो दिमाग (Mind) का एक भाग जो छींक (Sneeze) का मुख्य रूप से केन्द्र होता है. ये हिस्सा दिमाग (Mind) का निचला भाग (Lover Part) होता है जो तेजी से हमारे दिमाग (Mind) को सिग्नल (Signal) भेजता है जिससे हमारा गला, आंखें व मुंह खुद कसकर बंद हो जाते है.

इसके बाद तुरंत छाती की मांसपेशियां (Muscles) तन जाती हैं और गले की मांसपेशिया (Throat Muscles) आराम की मुद्रा में आ जाती है. जिसके परिणामस्वरूप ही एक हवा हमारे मुंह (Mouth) व नाक (Nose) से होती हुई बाहर निकलती है. जिसे हम छींक (Sneeze) कहते है.

2. छींक से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Important Fact)

ठंड में जुकाम (Cold) होना भी छींक (Sneezing) का कारण होता है, लेकिन शायद ही आप जानते होंगे कि छींक (Sneeze) के और भी कई मुख्य कारण (Important Cause) हो सकते हैं, जिनसे आज हम आपको अवगत कराएंगे.

आज हम आपको बताएंगे छींक (Sneeze) से जुड़े कुछ ऐसे रोचक (Fact) किस्से जिन्हें सुनकर यकीन मानिये आप हैरान हो जाएंगे.

3. छींक (Sneeze) आना होता है अच्छा

छींक (Sneeze) आने पर लोग अक्सर सामने वाले को शुभकामना (Wishes) देने लगते है क्योंकि ये जानकर शायद आपको बहुत हैरानी होगी कि छींक आपके स्वास्थ्य (Health) के लिए बहुत अच्छी होती है.

ये देखा गया है कि छींकने (Sneezing) से शरीर के हानिकारक जर्म (Germ) बाहर निकलते हैं और यह प्रतिरोधी तंत्र की प्रक्रिया में भी एक बेहद जरूरी हिस्सा होती है. इसलिए सेहतमंद जीवन (Healthy Life) के लिए छींक आना बेहद जरूरी होता है.

4. क्यों सोते वक़्त नहीं आती छींक (Sneeze)?

ये अक्सर देखा होगा कि यदि आपको छींक (Sneezing) आ रही हैं तो चाहते हुए भी आपको नींद (Sleep) नहीं आ सकती है. मतलब सोते वक़्त व्यक्ति (Sleeping Person) को छींक आना करीब-करीब असंभव होता है.

ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि उस समय नसें (Nerves) आराम की अवस्था (Rest Position) में होती हैं. इसलिए जब आप सोते हैं तो आपके साथ छींक (Sneeze) से जुड़ी सभी नसों (Nerves) को भी आराम मिलता है जिसके चलते कभी भी नींद के दौरान छींक नहीं आती है.

5. छींक की गति (Sneeze Speed)

विषेशज्ञों (Experts) के अनुसार छींक एक ऐसी क्रिया (Process) होती है जिसके आने पर हमारा शरीर भी काबू में नहीं रह पाता है और आमतौर पर हमारी आँखे (Eyes) इस दौरान खुद बंद हो जाती है, क्योंकि इसकी गति आश्चर्यजनक तेज होती है. जानकारी के लिए बता दें कि छींक (Sneeze) की रफ्तार 100 मील प्रतिघंटा (Speed 100 mil/h) होती है. जिसके साथ लगभग 100000 जर्म (Germ Free) की वातारण में मुक्ति होती है.

निष्कर्ष (Result):

दोस्तों अगली बार जब भी आपको छींक (Sneeze) आये तो समझ जाना कि ये आपके शरीर (Healthy Body) के लिए कितना अच्छा है, और ये भी कि छींकते (Sneezing time) वक़्त आँखें बंद होने के पीछे आखिर क्या कारण होता है.

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