क्या पढ़ाया जाता है पाकिस्तान में आजादी के बारे में: भारत और पाकिस्तान दोनों ही एक साथ आजाद हुई थी जब भी भारत की आजादी की बात की जाती है तो हमारे यहां किताबों के माध्यम से स्कूलों में पढ़ाया जाता है कि कई आंदोलन हुए और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बाद हमें यह आजादी हासिल हुई है. ऐसे में हमारे यहां किताबों में महात्मा गांधी से लेकर सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम भी लिया जाता है लेकिन क्या आप लोग जानते हैं कि पाकिस्तान में आजादी दिलाने का श्रेय इन लोगों को बिल्कुल भी नहीं दिया जाता. वहां पर तो कुछ और ही कहा जाता है. लेकिन अब सवाल तो यह खड़ा होता है कि जब दोनों को आजादी एक साथ मिला और दोनों की आजादी में इन्हीं लोगों ने भूमिका निभाई है तो फिर उनके लिए आजादी के नायक कौन थे आई आज हम आपको इस बारे में जानकारी देते हैं.
पाकिस्तान में आखिर क्या पढ़ाया जा रहा है?
पाकिस्तान में स्कूली किताबों के अगर बात करें तो साल 1947 में जो पाकिस्तान को आजादी मिली है उसे भारत-पाकिस्तान ब्रिटिश शासन से मिली आजादी के तौर पर बिल्कुल भी नहीं पढ़ाया जाता जबकि उसे आजादी को तो पाकिस्तान के अलग देश बनने की कहानी के रूप में ही पढ़ाया जाता है पाकिस्तान में यह पढ़ाया जाता है कि किस प्रकार मुसलमान ने पाकिस्तान को अलग देश बनाया है कैसे होमलैंड को हासिल किया है इसे टू नेशन थिअरी मुसलमानों की मांग और 1940 से 47 के पाकिस्तान Movement के बारे में ही बताया जाता है.
कुछ लोगों ने बताइए सच्चाई
अब ऐसे में जिन लोगों ने पाकिस्तान में पढ़ाई की हुई है और उनसे वहां की किताबों के बारे में कुछ सच्चाई भी सामने आई है पाकिस्तान में पढ़ाई करने और कई सालों के बाद भारत की नागरिकता लेने वाले स्वराज भील ने जानकारी दी है कि वहां की किताबों में तो आजादी की अलग ही कहानी दिखाई जाती है उनके अनुसार तो वहां कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के गुणगान किया जाते हैं और इन बातों पर भी जोड़ दिया जाता है कि किस प्रकार मुसलमान ने अपना अलग देश पाया है इसमें मुस्लिम लीग की कहानी और पाकिस्तान में बनने की कहानी पर ही जोड़ दिया जाता है.
हालांकि पहले फिर भी महात्मा गांधी वगैरह का हल्का सा जीकर भी किया जाता था लेकिन कई सालों से ऐसा कुछ भी नहीं रहा है साथ ही उन्होंने यही बताया है कि पहले किताबों में होली दिवाली और रामायण के बारे में भी थोड़ा बहुत पढ़ा दिया जाया करता था अब वह अध्याय गायब कर दिए गए हैं कुछ सालों से धार्मिक किताबों को शामिल कर दिया गया जिसकी वजह से सभी को इस्लामी कोर्स भी पढ़ना पड़ता है.
वहीं दूसरी तरफ जान बहादुर सिंह ने भी जानकारी दी है कि वहां के बच्चों को आजादी के बारे में अलग प्रकार से पढ़ाया जाता है उन्होंने बताया कि वहां की किताबों में महात्मा गांधी चंद्रशेखर आजाद आदि का कोई भी जिक्र नहीं किया जाता जबकि मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में बहुत अधिक पढ़ाया जाता है बताया ऐसा जाता है कि जैसे मुसलमानों ने हिंदुओं से अलग होकर अपना देश बना लिया हो और इस दौरान क्या अड़चन आई और किस प्रकार से पाकिस्तान के अलग देश बनने का काम शुरू हुआ.