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डिफॉल्टर की प्रॉपर्टी पर RBI का बड़ा एक्शन! बैंकों को मिला 7 साल का अल्टीमेटम

डिफॉल्टर की प्रॉपर्टी पर RBI का बड़ा एक्शन! बैंकों को मिला 7 साल का अल्टीमेटम

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने लोन डिफॉल्टरों की जब्त की गई प्रॉपर्टी को लेकर नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। अब बैंकों और NBFCs को ऐसी प्रॉपर्टी अधिकतम 7 साल के भीतर बेचनी होगी। RBI का कहना है कि बैंक जब्त संपत्तियों को लंबे समय तक अपने पास नहीं रख सकते।

🔍 क्या हैं नए नियम?

RBI के मुताबिक:

  • बैंक केवल उन्हीं संपत्तियों को अपने कब्जे में ले सकेंगे जो NPA (Non-Performing Asset) बन चुके लोन से जुड़ी हों।
  • संपत्ति तभी ली जाएगी जब बाकी recovery options फेल हो जाएं।
  • कब्जे में ली गई प्रॉपर्टी को “Specified Non-Financial Assets (SNFA)” माना जाएगा।
  • ऐसी प्रॉपर्टी को 7 साल के अंदर बेचना जरूरी होगा।

🚫 डिफॉल्टर वापस नहीं खरीद सकेगा प्रॉपर्टी

RBI ने साफ कहा है कि बैंक या NBFC जब्त संपत्ति को उसी डिफॉल्टर या उससे जुड़े लोगों को दोबारा नहीं बेच सकते। इससे “backdoor entry” रोकने की कोशिश की जा रही है।

💰 आम लोगों और बैंकों पर क्या असर होगा?

इन नियमों से:

  • बैंकों की फंसी हुई पूंजी जल्दी वापस आ सकेगी
  • NPA कम करने में मदद मिलेगी
  • प्रॉपर्टी recovery process ज्यादा transparent बनेगा
  • लंबे समय तक खाली पड़ी संपत्तियों का उपयोग हो सकेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बैंकिंग सिस्टम में transparency और accountability बढ़ेगी।

⚠️ अभी लागू नहीं हुए हैं नियम

फिलहाल RBI ने ये नियम draft form में जारी किए हैं और 26 मई 2026 तक stakeholders से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद final guidelines जारी की जा सकती हैं।

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