लग सकता है योगी आदित्यनाथ को झटका, संसदीय बोर्ड में मिलेगी इस मुख्यमंत्री को जगह?

लग सकता है योगी आदित्यनाथ को झटका, संसदीय बोर्ड में मिलेगी इस मुख्यमंत्री को जगह? भाजपा के नए सांगठनिक ढांचे और पदाधिकारियों की सूची सामने आने के साथ ही नई टीम का आकार साफ हो गया है। पार्टी के भीतर पदों का बंटवारा हो चुका है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में असली हलचल अब शुरू हुई है। सबकी नजरें अब भारतीय जनता पार्टी की सबसे शक्तिशाली और सर्वोच्च निर्णयकारी इकाई संसदीय बोर्ड पर टिकी हैं। यह वही मंच है जहां संगठन की रणनीति और सत्ता की धाराएं आपस में मिलती हैं।

सवाल बिल्कुल सीधा है: क्या इस बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को संसदीय बोर्ड में जगह दी जाएगी? और अगर दी जाती है, तो वह चेहरा कौन होगा—उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस?

भाजपा के भीतर केंद्रीय मंत्री या राष्ट्रीय पदाधिकारी बनना एक बात है, लेकिन संसदीय बोर्ड में जगह पाना पूरी तरह से अलग स्तर का राजनीतिक वजन दिखाता है। बोर्ड की टेबल पर बैठने का मतलब है कि आप पार्टी की नीति-निर्धारण के शीर्ष सोपान पर पहुंच चुके हैं।

गौतरलब है कि मुख्यमंत्री रहते हुए इस बोर्ड में लंबे समय तक रहने का सबसे बड़ा उदाहरण खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहे हैं। बाद में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इसका हिस्सा रहे। हालांकि, इस समय बोर्ड में कोई भी मौजूदा मुख्यमंत्री शामिल नहीं है, जिससे आने वाला फैसला और अधिक दिलचस्प हो जाता है।

दो बड़े दावेदार, दो अलग राजनीतिक शैलियां

दावेदार 1: योगी आदित्यनाथ

लोकप्रियता के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आधार, प्रखर हिंदुत्व का चेहरा और चुनावी रैलियों में भीड़ खींचने की जबरदस्त क्षमता, अगर योगी आदित्यनाथ को संसदीय बोर्ड में शामिल किया जाता है, तो यह सीधा संदेश होगा कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय नेतृत्व में उनका राजनीतिक कद और अधिक मजबूत हो चुका है।

दावेदार 2: देवेंद्र फडणवीस 

लोकसभा चुनाव के झटकों के बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी की जोरदार वापसी कराने का श्रेय, बेहतरीन चुनाव प्रबंधन और सांगठनिक बिसात बिछाने की क्षमता। फडणवीस पहले से ही पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के सदस्य हैं। संसदीय बोर्ड में उनका प्रवेश उनके रणनीतिक कौशल पर शीर्ष नेतृत्व की मोहर लगाएगा।

जहाँ एक नेता के पास सीधा जनसमर्थन और स्टार अपील है, वहीं दूसरे के पास चुनावी रणनीति और बारीक बिसात समझने का हुनर है। ऐसे में पार्टी भविष्य के संतुलन को देखते हुए किसे तरजीह देती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

क्या अब मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी?

संगठन का खाका खींचने के बाद अब सभी की निगाहें मोदी सरकार के संभावित कैबिनेट फेरबदल पर टिक गई हैं। सूत्रों के अनुसार, संगठन की नई टीम तो महज़ एक शुरुआत (ट्रेलर) थी; असली फेरबदल केंद्रीय मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन के साथ देखने को मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही कैबिनेट में बड़े बदलाव कर सकते हैं, जिसमें कई नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल संभव है।

कैबिनेट में जगह और खाली पदों के समीकरण:

शिक्षा मंत्रालय से धर्मेंद्र प्रधान के हटने के बाद प्रह्लाद जोशी अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। रवनीत सिंह बिट्टू के रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री पद छोड़ने और जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद कई पद खाली पड़े हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई है, जबकि पीयूष गोयल को पार्टी का नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। माना जा रहा है कि सांगठनिक जिम्मेदारियों के चलते इनके मंत्री पद भी रिक्त हो सकते हैं।

पंजाब और बंगाल के नए राजनीतिक समीकरण

कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की भी पूरी कोशिश दिख रही है: रवनीत सिंह बिट्टू के बाहर होने और हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बीच पंजाब में सिख चेहरे को लेकर चर्चा तेज है। पार्टी द्वारा मनप्रीत बादल को उपाध्यक्ष बनाए जाने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, हाल ही में राघव चड्ढा की पीएम मोदी से हुई मुलाकात के बाद यह चर्चा भी गरम है कि पार्टी पंजाब की सियासत में उनके युवा चेहरे और जेन-जी (Gen-Z) कनेक्ट का किस तरह इस्तेमाल करती है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए बागी सांसदों के नए गुट द्वारा एनडीए को समर्थन देने के ऐलान के बाद बंगाल का समीकरण बदला है। सहयोगी दलों की हिस्सेदारी तय करते समय इस नए राजनीतिक गणित का असर कैबिनेट में दिख सकता है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले भी संकेत दे चुके हैं कि नए सहयोगी दलों को मंत्रिपरिषद में जगह दी जा सकती है।

Leave a Comment