CJP के बाद अब खड़ी हो गई एक और पार्टी, रातो रात बढ़े फोल्लोवेर्स

15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से एक लंबा भाषण दिया, लेकिन उनके इस्तेमाल किए गए एक खास शब्द ने ऑनलाइन ऐसा हंगामा खड़ा कर दिया जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां जंगलों में बंदूक लेकर घूमने वाले नक्सलियों को काफी हद तक काबू कर लिया गया है, वहीं अब देश के भीतर “दिमागी नक्सली” अपना प्रभाव फैला रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ये लोग अपनी खास सोच और विचारधारा की आड़ में देश का माहौल खराब करना चाहते हैं; इसलिए समाज को इनकी पहचान करके इन्हें अलग-थलग करना चाहिए।

भाषण खत्म होते ही इस शब्द को लेकर ऑनलाइन बड़ी बहस छिड़ गई। लोग पूछने लगे कि आखिर कौन “बौद्धिक नक्सली” की श्रेणी में आता है, जबकि दूसरों ने इसे विपक्ष पर कसा गया राजनीतिक तंज माना। जाहिर है, इसके बाद मीम्स और रील्स की बाढ़ आ गई। इस गरमा-गरम माहौल के बीच, इंस्टाग्राम पर चुपचाप एक नया पेज सामने आया ‘दिमागी नक्सल पार्टी’। देखते ही देखते इस पेज के फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी। कुछ ही दिनों में 1,85,000 से ज्यादा लोग इस हैंडल से जुड़ गए।

यह पूरा घटनाक्रम कुछ महीने पहले की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की याद दिलाता है। तब भी, CJI की एक टिप्पणी के बाद रातों-रात ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का हैंडल बनाया गया था और उसने सिर्फ़ दस दिनों में 2 करोड़ (20 मिलियन) से ज़्यादा फॉलोअर्स हासिल कर लिए थे। अब, ठीक उसी पैटर्न पर चलते हुए, यह नया पेज भी लगातार फॉलोअर्स जुटा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह कोई असली राजनीतिक पार्टी नहीं है, और न ही इसे चुनाव आयोग से मान्यता मिली है। यह बस एक व्यंग्यात्मक इंटरनेट पेज है जिसने अपनी पहचान बनाने के लिए पीएम के भाषण के एक शब्द को आधार बनाया। X और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर भी इस नाम वाले कई पेज आ गए हैं।

जहां ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के दौर में अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम लाइव पर आकर बताया था कि वही यह पेज चला रहे थे, वहीं इस ‘बौद्धिक नक्सल पार्टी’ के पीछे का मास्टरमाइंड अभी भी अज्ञात है। Reddit पर हो रही चर्चाओं के अनुसार, इस पेज का मोटो ‘सोचें | रिसर्च करें | विरोध करें’ (Think | Research | Resist) है और लोग इसे राजनीतिक व्यंग्य के एक नए रूप के तौर पर देखते हुए तेजी से शेयर कर रहे हैं।

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