कांग्रेस ज्वाइन कर लूंगा लेकिन… शहजाद पूनावाला ने रखी ये शर्ते

बीजेपी के प्रवक्ता रह चुके शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे देने के बाद अब अपनी फैसले की वजह भी साफ कर दी है. पूनावाला ने बताया है कि यह फैसला उन्होंने कोई अचानक नहीं लिया है बल्कि करीब 2 साल से वह इस पर विचार कर रहे थे. उन्होंने कहा है की राजनीति के अंदर सक्रिय रहने के बावजूद भी रोजमर्रा के खर्चे चलाते रहते हैं और राजनीतिक पार्टियों में आम नौकरी की तरह नियमित वेतन तो नहीं मिलता. घर का किराया निजी जरूरत और दूसरे खर्च अपनी जगह भी बने रहते हैं इसी वजह से अब वह निजी क्षेत्र में काम करने की तैयारी कर रहे हैं.

वहीं दूसरी ओर जब कांग्रेस में लौट के सवाल पर उन्होंने कुछ ऐसी शर्ते गिरा दी जिनसे उनकी वापसी की संभावना फिलहाल तो काफी दूर नजर आ रही है उन्होंने भाजपा छोड़ने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के विचारधारा के प्रति अपना समर्थन जारी रखने की बातें कही है ऐसे में कांग्रेस में शामिल होने के लिए पूनावाला ने कौन सी दो शर्तें रखी है आईए जानते हैं?

शहजाद पूनावाला ने रखी यह शर्तें

जब पूनम वाला से पूछा गया कि क्या वह दोबारा से कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं तो उन्होंने सीधे तौर पर जवाब देने की बजाय अपनी शर्ट को सामने रख दिया उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस से हटा दिया जाए और नेहरू के कामों के लिए वह माफी भी मांगी जाए तभी वह कांग्रेस में जाने के बारे में विचार करेंगे.

प्रधानमंत्री के समर्थन में अपना रुख नहीं बदला

भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद भी पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपना रुख साफ किया है उन्होंने कहा है कि वह विचारधारा के स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही बने रहेंगे उन्हें यहां तक भी कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी से बड़ा नेता देश में ना तो कोई पहले आया है और ना ही आगे कोई आएगा पुणे वाला ने यह भी सवाल उठाया कि बीजेपी बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभाने के बाद भी क्या कोई व्यक्ति आसानी से किसी दूसरी पार्टी में चला जाएगा उन्होंने मौजूदा समय में बीजेपी को देश की सबसे अच्छी पार्टी बताया.

अभी बीजेपी ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया

शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों से तो इस्तीफा दे दिया है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अभी तक उनकी स्थिति को स्वीकार नहीं किया गया है ऐसे में अब नजर भी इस बात पर टिकी हुई है कि पार्टी उनके द्वारा दिए गए स्थिति पर क्या फैसला ले रही है वहीं दूसरी तरफ पुणे वाला के बयान से साफ हो जाता है कि फिलहाल उनका रुख प्राइवेट क्षेत्र की तरफ बढ़ने का है. कांग्रेस में वापसी को लेकर जो भी उन्होंने बातें कही हैं उससे भी उन्होंने अपने राजनीतिक रूप को लेकर तस्वीर साफ कर दी.

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